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About Pratapgarh


प्रतापगढ़, राजस्थान का 33 वाँ जिला है, इसका गठन 26 जनवरी 2008  को किया गया प्रतापगढ़ क्षेत्र माही नदी के तट पर बसा होने से 'कांठल प्रदेश' के नाम से जाना जाता है।

प्रतापगढ़ जिले के 5 उपखंड है  -
- धरियावद - छोटीसादड़ी - प्रतापगढ़ - पीपलखूंट - अरनोद

Geography and Climate of Pratapgarh (प्रतापगढ़ की भूगोल और जलवायु)- 

राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में उदयपुर सम्भाग में यह जिला 24.03 ° उत्तर और 74.78 ° पूर्व में स्थित है। इसकी औसत ऊंचाई 491 मीटर (1610 फीट) है और कहा यह जाता है कि ऊँचाई की दृष्टि से राजस्थान में माउन्ट आबू के बाद सर्वाधिक ऊँचाई वाला यही जिला है। यह सर्वाधिक प्राचीन पर्वतमाला अरावली और मालवा के पठार की संधि पर अवस्थित। यहाँ भूमि आम तौर पर उर्वरक काली मिट्टी है, जो ज्वालामुखी-लावा से निर्मित है। 

जिले की प्रमुख नदियाँ जाखम, माही और सिवाना या शिव हैं। अन्य मौसमी नदियाँ हैं सोम, एरा और करमोई। प्रतापगढ़ का भौगोलिक क्षेत्रफल 4,11,736 हेक्टेयर है, जिसमें से वन क्षेत्र 1,20,976 हेक्टेयर (2009-10) है। भौगोलिक दृष्टि से आरक्षित वन-क्षेत्र । 856 मिमी औसत वार्षिक वर्षा है।

 प्रतापगढ़ का इतिहास
राजमहल देवगढ़  
प्रतापगढ़ का मेवाड़ के गुहिल वंश की सिसोदिया शाखा से सम्बंध रहा है इसी वंश के शासक क्षेमकरण के पुत्र राजकुमार सूरजमल 1514 . में देवगढ़ (देवलिया) का शासक बना। 

महारावल प्रतापसिंह ने 1699 . में देवगढ़ के समीप प्रतापगढ़ कस्बे की स्थापना की। कालान्तर में प्रतापगढ़ देवगढ़ की राजधानी बना था। अतः इस नगर को देवलिया प्रतापगढ़ नाम से पुकारा जाता था।

धरियावद, प्रतापगढ़ के पास एक और छोटा शहर, 15 वीं शताब्दी के मध्य में महाराणा प्रताप के पोते, राणा सहसमल द्वारा स्थापित किया गया था।






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