पानी पानी होकर चीनी नत मस्तक हो जायेगा - Apna Pratapgarh

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Saturday, June 20, 2020

पानी पानी होकर चीनी नत मस्तक हो जायेगा

पंचशील के सिद्धांतों को 
हमने दिल से स्वीकारा हैं।
गुटनिरपेक्ष रहे हरदम 
यह स्वाभिमान हमारा हैं।

चोरी करके सीनाजोरी 
बार बार कर जाता हैं
गिरगिट जैसे रंग बदलता 
हमको आख दिखाता हैं।

कद छोटा आंखे छोटी 
कुटिल चाल चल जाता हैं।
जाबाज निहत्थों पर तेरा 
दाव एक चल जाता हैं।

छीना झपटी जाल बिछाकर
भारत को उकसाता हैं
गालवन घाटी में धोखे से 
घात बडी दे जाता हैं।

शायद फिर से भूल गया  
तू शेरों से टकराया हैं।
आगे बढकर फिर तूने 
सोया सिंह जगाया हैं।

आभास नही है तूझे अभी 
फौलाद से लडने आया हैं।
सोची समझी साजिश से 
तू आगे बढता आया हैं।

हमने भी पिछे हटना 
लेकिन कब स्वीकारा है ।
आगे बढकर दुश्मन को 
हमने सबक सिखाया है।

है कसम हमें उन वीरों की 
हद पार नही करने देंगे।
इंच इंच भूमि अपनी 
हरगीज ना लेने देंगे।

कदम बढाया जो आगे 
वो पांव नही रहने देगे।
तेरे हर मनसुबे में 
घुसपैठ नही होने देंगे

मानसरोवर तीर्थ हमारा 
श्रद्धा से झुक जायेगे
बाधा डाली तूमने तो
त्रिनेत्र सभी खुल जायेगे।

भगवान बुद्ध को नमन करे 
हम मानवता अपनाते हैं।
खज्जर पीठ में जो मारा 
तो अंगारे बरसाते हैं।

अंतिम बार हम कहते है
वर्ना तुम पछताओगे
झूठे दंभ में रहने वाले
एक सुई बेच ना पाओंगे

व्यापार रूकेगा जब इसका
आयात बंद हो जायेगा
हिंदी चीनी भाई भाई 
फिर से ये चिल्लायेगा

अर्थव्यवस्था चौपट होगी 
घुटनो पे आ जायेगा
पानी पानी होकर चीनी
नत मस्तक हो जायेगा।
    
      सुरेन्द्र सुमन 
       प्रतापगढ

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