सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान - Apna Pratapgarh

Advertise Your Business Here

test

Friday, June 12, 2020

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान

सीता माता वन्यजीव अभ्यारण्य  राजस्थान के प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिले  में स्थित  है, जिसे राजस्थान सरकार द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। यह एक घना जंगल है, जिसका क्षेत्रफल 422.94 वर्गकिलोमीटर है। यह अरावली, विन्ध्याचल और मालवा के  पठार से मिलकर  सीमा बनाता  है जिसमें  जाखम, करमोई, सीतामाता, बुढो, और टंकिया आदि मौसमी नदियाँ बहती हैं।इस वन की जीवन-रेखा जाखम नदी, जिसका पानी गर्मियों में भी नहीं सूखता है।  यह वन प्रतापगढ़ से लगभग 45 किमी और संभागीय मुख्यालय से 108 किमी दूर स्थित है।
सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान

इस अभ्यारण्य में वृक्ष ,घास, लताओं और झाड़ियों की कई प्रजातियां  हैं एवं कई दुर्लभ औषधीया  और अनगिनत जड़ी-बूटियां हैं जो शोधकर्ताओं के लिए शोध का विषय हैं।  इस वन में उच्च मूल्य सागवान, तेंदू, पीपल, बबूल, नीम, सेमल, अशोक, कचनार, गुलमोहर, अमलतास, आंवला, बांस और खेजड़ी आदि भी शामिल हैं।

इस अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में आवासीय और प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं। यहां सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण वन्यजीव चौसिंघा और सीतामाता की परी के रूप में विख्यात  उड़न गिलहरी(रेड फ्लाइंग स्किवरल पेटोरिस्टा एल्बी वेंटर) भी पाई जाती हैं जिसे स्थानीय भाषा में आशोवा नाम से जाना जाता है। इसे देखने का सबसे अच्छा समय फरवरी और मार्च के बीच होता है अभ्यारण्य में विभिन्न प्रकार के हिरण हैं, जिनमें चौसिंगा (चार सींग वाले मृग) और स्प्रियर हिरण शामिल हैं एवं कराकल, जंगली सूअर, पैंगोलिन, भारतीय तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, गोल्डन सियार, बंगाल लोमड़ी, जंगल बिल्ली, साही, भालू और नीलगाय भी मौजूद हैं ।

इस अभ्यारण्य का ऐतिहासिक पौराणिक महत्व यह हे की  यहां प्राचीन वाल्मीकि आश्रम (लव और कुश की जन्मस्थली) और सीतामाता का मंदिर है ।
सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Advertise Your Business Here

banner image