में हु कोरोना - Apna Pratapgarh

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Friday, May 15, 2020

में हु कोरोना

(1)में हु कोरोना : - 

मेरा नाम है कोरोना,
तुम हल्के में मत लोना ,
कर दूंगा तुमको सबसे दूर में ।

में जन्मा चीन के अंदर,
और बन बैठा हूँ सिकंदर,
जाऊँगा न अब खाली हाथ में ।

गर चाहते तो तुम बचना,
फिर घर में ही तुम रहना,
हाथ धोने से ही मरेगा बार बार ये।

सर्दी खाँसी गर होना,
तुम जरा भी डरो ना,
जाँच करवाना जाके अस्पताल में।

सरकार कहे जो करना,
मनमानी तुम मत करना,
आइसोलेशन से ही होता सबसे दूर में।

एक दिन में चला जाऊंगा,
फिर याद बहुत आऊंगा,
पहचानेगें सभी covid-19 नाम से।

(2)कलयुग बैठा मार कुंडली पर आधारित एक गीत
शीर्षक:-(बाहर कोरोना बैठा है)

फस गया हूं घोर संकट में, अब किस किस को समझाऊं।
बाहर कोरोना बैठा है,घर में रहकर इसे भगाऊँ।।

सर्दी खाँसी फ्लू जैसे,रोग भले ही मिल जाए।
पर कोरोना सा रोग मिले न,लाख जतन मिट न पाए।।
मास्क लगाकर सेनिटाइजर से,सबके हाथ धुला जाऊ।
बाहर कोरोना बैठा है, घर में रहकर दूर भगाऊँ।।

रिश्ते नाते दोस्ती यारी,सभी दूर से रखने है।
दो गज की दुरी से सारे,अपने ही तो बचने है।।
चौथा लोकडाउन लग चुका है,कितना आगे इसको ले जाऊ।
बाहर कोरोना बैठा है,घर में रहकर दूर भगाऊँ।।

14 दिन क्वारेंटाईन का पालन सभी को करना है।
गर परेशानी कुछ हो तो,
आइसोलेशन में रहना है।।
डॉक्टर,पुलिस,सफाई वाले की सेवा कभी न भूल पाऊं।
बाहर कोरोना बैठा है,घर में रहकर दूर भगाऊँ।।

आवागमन की परेशानी को,भला सभी समझते है।
गरीब मजदूर बेचारें ,कितना अभी तड़पते है।।
कोरोना योद्धाओं बिना,कैसे जंग में जीत पाऊं।
बाहर कोरोना बैठा है,घर में रहकर दूर भगाऊँ।।

सब कुछ बंद पड़ा है बाहर, लगा सभी जगह ताला।
धीरे धीरे छूट मिल रही, अभी खुली है मधुशाला।।
कहे "कमल"कविराय सबसे,काम पड़े तो बाहर जाऊ।
बाहर कोरोना बैठा है, घर में रहकर दूर भगाऊँ।।

स्वरचित कमलेश शर्मा
कवि "कमल" अरनोद

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