कवि / लेखक तथा रचनाएँ - Apna Pratapgarh

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Friday, May 22, 2020

कवि / लेखक तथा रचनाएँ

जाने दो
जाने दो, अब मुझे घर जाने दो ।
जीते रहें , तुझे जीलाते रहें ।। 
आखिर वक्त की खता क्या है
 कभी-कभी मुहब्बत में दिल टूट जाते हैं, अक्सर अपनों के साथ छूट जाते हैं।। 
 मजदूर हूँ मैं , पर मजबूर नहीं
मजदूर हूँ मैं , पर मजबूर नहीं । मेरी गरीबी कोई कसूर नहीं ।। 
बूढ़ी आँखें

आँख ज्यादा दर्द कर रही है अम्मा ? '
 हाँ बुढ़ापे की आँखें हैं न। ।

 कोरोना से बचाव ही उपचार है..


फैला ये कोरोना साबुन से हाथ धोना, यही है मेरा कहना उपाय तुम करो,ना। 

तुम्हारे जाने के बाद
उठाईगीरों के सरदार हो अलग कर दूंगा तो ढीली हो जाएगी धोती।।

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