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Thursday, July 2, 2020

सोशल डिस्टेंसिंग के दौर में भावनात्मक डिस्टेंसिंग ना रखें - ललित शर्मा

July 02, 2020 0
सोशल डिस्टेंसिंग के दौर में भावनात्मक डिस्टेंसिंग ना रखें - ललित शर्मा
सोशल मीडिया फेसबुक, Whatsaap,  इंस्टाग्राम आदी की Virtual लाइम लाइट, चकाचौंध में जो जितना ज्यादा भीड़ में वह उतना ज्यादा अकेला होता है । ऐसा मेरा मानना है हो सकता है आपका विचार और अनुभव इससे अलग भी हो परन्तु ये सच्चाई है की ये Virtual दुनिया दिखावा और काल्पनिक अधिक है।

हम  इससे वास्तिक रिश्तो और लोगो से भावनात्मक रूप से दुर होते जा रहे है । लोग परेशान हो जाते है संघर्ष करते करते पर हिम्मत नहीं हारते। स्ट्रांग बनिये, इस Virtual वर्ल्ड से बाहर निकलिए औरों के लिए न सही अपने लिए अपने हीरो बनिये । आईने में देख कर फील होना चाहिये आने दे जो भी संकट आये, देख लेंगे, लड़ लेंगे जो होगा वो अच्छा ही होगा की सोच के साथ अच्छे और नेक कर्म करते जाये ।

जितना हो सके उतनी खुले दिल से और बिना दिखावे के लोगो की मदद किजीये, अच्छे बनने का दिखावा नही वास्तव मे अच्छा बनना ही मानवता है ।

सोशल डिस्टेंसिंग के इस दौर में इमोशनल डिस्टेंसिंग को हावी मत होने दीजिए। अपने दोस्तों से बात करिए। अपने परिवार के साथ वक़्त बिताए। अपने सहयोगियों को सहयोग किजीए ।अपने पडोसियों  के साथ शान्ती से रहिये। हो सकता है किसी को आपकी ज़रूरत हो। शायद आप किसी की कुछ मदद कर सकें। एक दूसरे से दूर भले रहे पर एक दूसरे से बातचीत मत छोड़ें, पता नहीं कौन किस मानसिक स्थिति से गुजर रहा हो और आपके एक फोन काँल से उसे मानसिक शन्ति मिल जाए? हर रोज किसी अपने जान पहचान के किसी भी व्यक्ति से फोन पर बात करें । चर्चा किजीए अपनी समस्या पर, देश के मुद्दो पर, अपनी स्किल्स के डेवलपमेंट पर या फिर किसी के Knowledge को Update करने में।

किसी अपने से बात किजीये।।

दिखावा या झूँठ कुछ समय की सहानुभूति के अतिरिक्त और कुछ प्रदान नहीं कर सकता जबकि सच्चाई सत्य आपको सब कुछ दे सकता है..झूँठ बोलकर या किसी को धोखा देकर कुछ सिद्ध नहीं कर सकते...पर लोगो की मदद करके , उनको सही रास्ता दिखाकर  कम से कम ये तो सिद्ध किया ही जा सकता है  की मानवता अभी भी है मेरे मित्र !! सच्चे,अच्छे और नेक लोगो की अभी कोई कमी नही हुई है। कब किसके मन में क्या चलता है कोई नहीं जानता, हमारा लक्ष्य यही होना चाहिए कि कभी भी किसी को बुरा भला ना कहें, जितना हो सके आपस में प्रेम और सद्भाव रखें।

हर सुखद एहसास किसी सच्चाई के साथ ही आता है  खुद की अट्टहास की ध्वनी हमें नींद से जगाती हैं और फिर हम निकलते हैं अपनी राहों पर, नए उन्मादों के साथ सफर कम बोझिल लगने लगता है। निकलिए बदलाव के इस दौर मे एक हीरो के रूप मे, लोगो की भलाई का सपना लीये - Be a  HERO ,our world need more HEROES के स्लोगन के साथ । 

जब हम नई उम्मिद के साथ निकलते है तो  ऋतुएं रंगीन लगती हैं । रास्ते lushgreen होते है। मौसम बारिश जैसा फील होता है  तब हम इंद्रधनुष देख कर खूश होते हैं ,आंखे बन्द कर के महसूस करने की झूठी कोशिश नहीं करते है। तब हमें पता होता हैं लॉज् ऑफ ड़िफ्रेक्सन । तब कुछ एहसास होता है तो वो यह है कि " काश " और " हमेशा " के बीच अगर कुछ सच है तो वो है " एक्जिस्टेंस" और वही है " जीवन " इतना महसूस होते ही हम खुद को उड़ता हुआ पाते हैं, हम बन जाते हैं सुपर हीरो।

बुने हुए बातूनी सपनों को खोल देते हैं और लग जाते हैं कर्म करने में। फिर अपनी सुपर पावर से बचाने की कोशिश करते हैं, सबसे पहले खुद को और फिर औरो को जीये.........नई उम्मिद, नये सपनो के साथ ।

           Heros are never born. They just only reborn. And then resuscitate too.

       ललित शर्मा
      Motivational Speaker and Writer
     प्रतापगढ़
Distancing - Social and Emotional

Monday, June 22, 2020

दुश्मन देश तक ललकार ..

June 22, 2020 0
दुश्मन देश तक ललकार ..
आज भारत और पाकिस्तान तथा चीन के बीच में जो तनाव चल रहा है उस पर मेरी पंक्तियाँ। अगर मेरी ललकार दुश्मन देश तक पहुचे तो आशीर्वाद देना।

जय हिंद, जय भारत, जय जवान
      :::---------(ललकार)----->
दुश्मन देश के सुनले मेरी, छोटी सी ललकार।
थाम ले अपने कदम नहीं तो, खायेगा फिर मार।।

ये वो भारत नहीं रहा, जो गोली से डर जायेगा।
आग से खेलनें वाला क्या, चिंगारी से डर पायेगा।।
अगर मुँह की खानी हो तो, हो जा फिर तैयार।
थाम ले ..............

बार बार सीमा पर हमसे, ऐसे ही उलझता है।
कितनी बार समझाया सबने, फिर भी ना समझता है।।
दम है तो घुसपैठ रोक कर, सामने से कर वार।
थाम ले...........

कितने वीर शहीद हुए, चाहे हम भी हो जायेंगे।
लाहौर क्या चीन में भी एक दिन, हम जन गण मन गाएंगे।।
उबल रहा है लहुँ हमारा, ले ली हाथों में तलवार।
थाम ले..........

मातृभूमि की आन के आगे, जान की परवाह कोन करे।
नर क्या नारी ने काट के, थाल में अपने शीश धरे।।
हिंदुस्तान की मिट्टी से कभी, पैदा होते नहीं सियार।
थाम ले....…….

है माँ तेरे लालों ने, बांध लिया सर पे कफ़न।
छोड़ेंगे ना दुश्मन को ,कर देंगे उसको दफ़न।।
अब "तिरंगा" लहरायेगा, हर चौखट घर द्वार।
थाम ले.…….…

कमलेश शर्मा "कमल"
मु.पो.-अरनोद, जिला:- प्रतापगढ़ (राज.)
Defiance enemy

Saturday, June 20, 2020

प्रतापगढ़ में हुआ योग भवन का लोकार्पण

June 20, 2020 0
प्रतापगढ़ में हुआ योग भवन का  लोकार्पण
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर परिषद सीमा क्षैत्र में सांसद मद से स्वीकृत 20 लाख रू. की राशि से निर्मित योगभवन का लोकार्पण चितौड़-प्रतापगढ़ सांसद सी.पी.जोशी व सभापति कमलेश डोशी एवं समाजसेवी भागीरथ जोशी के कर कमलों से हुआ।
प्रतापगढ़ में हुआ योग भवन का  लोकार्पण

यहां कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा पूर्व न.पा. उपाध्यक्ष शांतिलाल डोशी व भाजपा नेता हेमंत मीणा भी उपस्थित रहे । जानकारी देते हुए नगर परिषद सभापति कमलेश डोसी ने बताया कि योग दिवस की पूर्व संध्या पर सोशल डिस्टेनसिंग की पालना करते हूए एक सादे समारोह में सांसद सीपी जोशी द्वारा पार्षद एवं अतिथियों की उपस्थिति में योग भवन का लोकार्पण किया गया।
प्रतापगढ़ में हुआ योग भवन का  लोकार्पण

इस अवसर पर वृक्षारोपण का पुनीत कार्य भी किया गया । गौरतलब है कि नगरपरिषद की ओर से स्वस्थ शहर के तहत शहर में योग करने के लिए भवन और ओपन जिम बनाने की कवायद की जा की गई थी। इस हेतु शहर के परदेशी पार्क के पास भवन का निर्माण किया गया है जिसमें योग करने के लिए सुविधाएं विकसित की जाएगी। योग भवन बनने के बाद अब लोगों को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। यहां कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ता एवं नगर परिषद के पार्षदगण व योग प्रेमी व पतंजलि योग समिति के तरुणदास बैरागी सहित समिति के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
योग प्रेमी और पतंजलि योग समिति के कार्यकर्ता द्वारा किया गया हवन

कांठल के कलमकार ने लिखी वृक्ष चालीसा, सांसद सीपी जोशी को की भेंट।

June 20, 2020 0
कांठल के कलमकार ने लिखी वृक्ष चालीसा, सांसद सीपी जोशी को की भेंट।
प्रतापगढ़ जिले के अरनोद निवासी शिक्षक कवि कमलेश शर्मा"कमल" ने सांसद महोदय श्रीमान सीपी जी जोशी को वृक्ष(पर्यावरण) चालीसाभेंट की।

जिले के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय धुरावतों का खेड़ा(अचलावदा) ब्लॉक अरनोद के शिक्षक कमलेश शर्मा" कमल" में पर्यावरण दिवस पर लिखी वृक्ष चालीसा सांसद महोदय को भेंट कर लोगो को जागरूक करने का प्रयास किया है। आज योग भवन के उद्घाटन के कार्यक्रम में आये सांसद महोदय को अपने साथियों के साथ मिलकर सप्रेम भेंट की।

शर्मा अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करते रहते है तथा अपनी कई रचनाओं के माध्यम से लोगो में नई उम्मीद और जागरूकता का प्रयास कर के नई मिशाल कायम करी हे। समय समय पर विभिन्न अवसरों पर इनकी कविताओं का प्रकाशन पत्र पत्रिकाओं में होता रहता है। सांसद महोदय ने इनको बधाई और शुभकामनाएं दी और उज्जवल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर रवि शर्मा, अतुल ठाकुर, विजेश नाथ, श्रीमान रमेश चंद्र जी पुरोहित,पंकज शर्मा सुन्दर लाल चौधरी आदि उपस्थित थे।
कांठल के कलमकार ने लिखी वृक्ष चालीसा, सांसद सिपी जोशी को की भेंट।

पानी पानी होकर चीनी नत मस्तक हो जायेगा

June 20, 2020 0
पानी पानी होकर चीनी  नत मस्तक हो जायेगा
पंचशील के सिद्धांतों को 
हमने दिल से स्वीकारा हैं।
गुटनिरपेक्ष रहे हरदम 
यह स्वाभिमान हमारा हैं।

चोरी करके सीनाजोरी 
बार बार कर जाता हैं
गिरगिट जैसे रंग बदलता 
हमको आख दिखाता हैं।

कद छोटा आंखे छोटी 
कुटिल चाल चल जाता हैं।
जाबाज निहत्थों पर तेरा 
दाव एक चल जाता हैं।

छीना झपटी जाल बिछाकर
भारत को उकसाता हैं
गालवन घाटी में धोखे से 
घात बडी दे जाता हैं।

शायद फिर से भूल गया  
तू शेरों से टकराया हैं।
आगे बढकर फिर तूने 
सोया सिंह जगाया हैं।

आभास नही है तूझे अभी 
फौलाद से लडने आया हैं।
सोची समझी साजिश से 
तू आगे बढता आया हैं।

हमने भी पिछे हटना 
लेकिन कब स्वीकारा है ।
आगे बढकर दुश्मन को 
हमने सबक सिखाया है।

है कसम हमें उन वीरों की 
हद पार नही करने देंगे।
इंच इंच भूमि अपनी 
हरगीज ना लेने देंगे।

कदम बढाया जो आगे 
वो पांव नही रहने देगे।
तेरे हर मनसुबे में 
घुसपैठ नही होने देंगे

मानसरोवर तीर्थ हमारा 
श्रद्धा से झुक जायेगे
बाधा डाली तूमने तो
त्रिनेत्र सभी खुल जायेगे।

भगवान बुद्ध को नमन करे 
हम मानवता अपनाते हैं।
खज्जर पीठ में जो मारा 
तो अंगारे बरसाते हैं।

अंतिम बार हम कहते है
वर्ना तुम पछताओगे
झूठे दंभ में रहने वाले
एक सुई बेच ना पाओंगे

व्यापार रूकेगा जब इसका
आयात बंद हो जायेगा
हिंदी चीनी भाई भाई 
फिर से ये चिल्लायेगा

अर्थव्यवस्था चौपट होगी 
घुटनो पे आ जायेगा
पानी पानी होकर चीनी
नत मस्तक हो जायेगा।
    
      सुरेन्द्र सुमन 
       प्रतापगढ

बारिश का मौसम और चाय वाला इश्क़ ।

June 20, 2020 0
बारिश का मौसम और चाय वाला इश्क़ ।
मैं चाय की उतना ही शौकीन हूँ जितना प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाला current  GK की बुक का होता है  या  उतना जितना कोई भक्त प्रभु दर्शन का होता है। मे  चाय  का उतनी है तलब है जितना किसी  pugb  लवर को revival होने की   होती  है मुझें चाय का इन्तज़ार उससे भी कही ज्यादा  होता है  जितना exam मे किसी स्टूडेंट को कही इधर उधर से किसी question का answer मिलने का होता है  । मेरे चाय वाले किस्से तो बहुत है। कुछ अपने, कुछ दोस्तों के साथ ।

जेसे जयपुर के GT रोड़ की वो mba वाली चाय या फिर कॉलेज की कैंटीन पर चाय तो सब पियेंगे  पर बिल  के लिए number  वाला गेम। या फिर घन्स्सू की वो चाय की दुकान  जहा चाय पिते  पिते ही पता ही नही चला और कब RPSC का exam clear हो गया। पर इस बार अपना किस्सा सुनाता हूं । मेरे शहर की बारिश जो काम पर जाने के वक़्त ही अक्सर  आती हैं। ऐसे ही किसी एक दिन बारिश आई और न हमारे पास छाता न रेन कोट फिर भी हम निकल पड़े  काम पर जाने के लिए । काम पर जाना भी जरूरी था और नई नौकरी का जोश भी था । भगवान का नाम लिया निकल पड़े।

शहर की तंग गलियों की ख़ासियत है कि गली सिर्फ गीली होती है, पानी जमता है लेकिन बारिश सीधी नही गिरती आप पर जब तक आप बस स्टॉप न पहुँच जाओ। गली के मोड़ पे चाय की दुकान थी जो रात तक exam की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खुली रहती है। मैंने भी उसी दुकान की काली प्लास्टिक से ढकी छत के नीचे सहारा लिया बरिश से बचने के लीये । वेसे मुझे बस स्टैंड तक तो ही तो  जाना  था। इधर उधर नज़र घुमाई पर बारिश में ऑफिस जाने वाला कोई और नज़र नही आया ।

एक  गहरी  लम्बी साँस लेकर मैंने अपने आप को तैयार किया कि भाग कर बस स्टैंड तक पहुँच जाऊ तभी कोई उस काली प्लास्टिक के नीचे आकर मेरे बगल में खड़ा हुआ । देखा तो मेरी तरह आधी भीगी वही शख्स था जिसे  कई बार मेने मेरी गली के बाहर या बस स्टॉप पे पहले भी देखा था। मैं थोड़ा nervous सा फील कर रहा था  क्योंकि पहली बार वो एकदम मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई ।ऐसा लगने लगा  जेसे air is पिंक स्काई  is blue और भी वेसे जेसे हम फिल्मो मे देखते है ना same वेसा ही। जेसे हवा ज़ोर से चली और प्लास्टिक का सारा पानी उसके ऊपर जाकर गिरा। हम दोनो ने अपनी आंखें बंद कर ली। आंख खोलने के बाद हम दोनों ने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराया और फिर उसने अपने हाथ में रखा छाता मुझे देकर सामने वाली बिल्डिंग में चली  गईं । इससे पहले की में कुछ बोल पाता वो जा चुकी थी ।

आज भी वो छाता मेरे पास है। अमानत है वो किसी की । फिर, वो छाता कभी इस्तेमाल नही किया। चाय की वो दुकान आज भी वही है, पता नही कितनी कहानियां उस दुकान पे बनी। मैंने उस दुकान पर अक्सर  चाय पी और उस दुकान को हमेशा याद किया।  जब कभी बारिश आती है तो घर के कोने में पड़े उस छाते को एक नज़र देख लेता हूं। काश कोई वो छाता लेने फिर से आये। काश वो चाय वाला इश्क़ फिर से महक उठे ।

 चाय में मिला के कुछ पल चाहत के...
आ तुझे घूंट घूंट में मेरा एहसास करा दूं...।।।

लेखक - ललित शर्मा, प्रतापगढ़
rainy season and tea

Thursday, June 18, 2020

दोस्त बहुत याद आते हैं

June 18, 2020 0
दोस्त  बहुत याद आते हैं

मे अपनी यादों का किस्सा बताऊ 
तो बहुत याद आते हैं, कुछ दोस्त।
*****
      मै बिते पल को महसूस करू
      तो भी कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं
*****
अब जाने कहा है वो,
खो गये किस शहर में वो सब।
सुबह जल्दी उठूँ या देर रात तक जागूँ  में,
तो भी, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं
*****
 बातें थीं हमारी पहली बारिश की मिट्टी सी महक वाली,
कुछ लम्हे थे खुशी के,साथ सफर के वो स्कुल पिक्निक के वो कॉलेज की कैंटीन के जो किसी भी दुसरी खुशी से ज्यादा अच्छे थे,

मै रोड़ पर जाऊं या पार्क मे टहलूँ तो,
 या जाऊं किसी कॉलेज या खेल के मैदान मे ।
तो भी कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
*****
 जिंदगी बदल सी गई अब हम सबकी ।
नये आकार मे ढल सी गई ये जिन्दगी ।

कोई बिज़ी है अपने बिज़नेस मे तो
कोई  crazy हैं बीबी के पीछे ।

कोई बिज़ी है फैमिली मे तो कोई है
जिसे अपनी ही बेटी को परी बनाना है ।

कोई pubgलवर है तो कुछ हो गये पार्टी लवर ।
बहुत सो को नौकरी से फुरसत नही,कोई फैमिली से फ़्री नही। 
किसी को शायद अब अपने मतलब के अलावा किसी से कोई मतलब नही।

शायद अब किसी को दोस्तों की जरुरत नही ।

कोई  upsc/rpsc की तैयारी में डूबा है तो किसी को बाबू शोना से फुर्सत नही ।

सारे दोस्त पता नही कहा गुम हो गये , न जाने हम कब इतने बड़े हो गये की तू से आप और तुम हो गये है

      मै बिते पल को सोचूँ      
      तो, भी कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
*****
सभी मित्रो को समर्पित ।
दोस्तो ज़िन्दगी मे दोस्ती के लिए हमेशा जागते रहे। खुश रहिये।यादो को महुस्स करते हुये मिलते रहे।
Lalit Sharma
Author & Motivational Speaker प्रतापगढ़
Miss friends

Friday, June 12, 2020

"मृत्युभोज" यह एक सामाजिक अभिशाप

June 12, 2020 0
"मृत्युभोज" यह एक सामाजिक अभिशाप
मृत्युभोज

मातम छा जाता उस घर में, आँसू रुक ना पाते है।
चाहे गरीब या अमीर हो, मौत के दर सब जाते है।।
शोक संवेदनाएं जिन्दा, रहती है बस बारह दिन।
तेरहवीं पर सब समाज मिल कर, मृत्यभोज को खाते है।।

कोई दीपक बुझ गया, या राखी का तार टुटा।
सर से साया हटा किसी का, और किसीका सिंदूर मिटा।।
सारी उम्र कमा-कमा कर, तिनका तिनका जोड़ा सका।
इस सामाजिक कुरीति ने उस गरीब को बहुत लूटा। 

खेती-बाड़ी, घर,जेवर,और खुद भी बिक जाता है।
लोक लाज के खातिर फिर भी, सबको बुलाता है।।
हाथ झटक कर चल देते है, सारे रिश्ते और नाते।
उसको पता है केवल वो कैसे, मृतक भोज कर पाता है।।

हे सामाजिक मनीषियों, कुछ तो नव संधान करो।
डूबता जा रहा समाज, कोई तो इसपे ध्यान धरो।।
चिंगारी एक ऐसी जलाओ, अभिशाप दूर कर जाए।
उठो क्रांतिकारी वीरो, इस मृत्युभोज को बंद करो।।

कमलेश शर्मा "कवि कमल" (अध्यापक)
मु. पो.-अरनोद, जिला:-प्रतापगढ़ (राज.)
मो.9691921612

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान

June 12, 2020 0
सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान
सीता माता वन्यजीव अभ्यारण्य  राजस्थान के प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिले  में स्थित  है, जिसे राजस्थान सरकार द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। यह एक घना जंगल है, जिसका क्षेत्रफल 422.94 वर्गकिलोमीटर है। यह अरावली, विन्ध्याचल और मालवा के  पठार से मिलकर  सीमा बनाता  है जिसमें  जाखम, करमोई, सीतामाता, बुढो, और टंकिया आदि मौसमी नदियाँ बहती हैं।इस वन की जीवन-रेखा जाखम नदी, जिसका पानी गर्मियों में भी नहीं सूखता है।  यह वन प्रतापगढ़ से लगभग 45 किमी और संभागीय मुख्यालय से 108 किमी दूर स्थित है।
सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान

इस अभ्यारण्य में वृक्ष ,घास, लताओं और झाड़ियों की कई प्रजातियां  हैं एवं कई दुर्लभ औषधीया  और अनगिनत जड़ी-बूटियां हैं जो शोधकर्ताओं के लिए शोध का विषय हैं।  इस वन में उच्च मूल्य सागवान, तेंदू, पीपल, बबूल, नीम, सेमल, अशोक, कचनार, गुलमोहर, अमलतास, आंवला, बांस और खेजड़ी आदि भी शामिल हैं।

इस अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में आवासीय और प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं। यहां सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण वन्यजीव चौसिंघा और सीतामाता की परी के रूप में विख्यात  उड़न गिलहरी(रेड फ्लाइंग स्किवरल पेटोरिस्टा एल्बी वेंटर) भी पाई जाती हैं जिसे स्थानीय भाषा में आशोवा नाम से जाना जाता है। इसे देखने का सबसे अच्छा समय फरवरी और मार्च के बीच होता है अभ्यारण्य में विभिन्न प्रकार के हिरण हैं, जिनमें चौसिंगा (चार सींग वाले मृग) और स्प्रियर हिरण शामिल हैं एवं कराकल, जंगली सूअर, पैंगोलिन, भारतीय तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, गोल्डन सियार, बंगाल लोमड़ी, जंगल बिल्ली, साही, भालू और नीलगाय भी मौजूद हैं ।

इस अभ्यारण्य का ऐतिहासिक पौराणिक महत्व यह हे की  यहां प्राचीन वाल्मीकि आश्रम (लव और कुश की जन्मस्थली) और सीतामाता का मंदिर है ।
सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, प्रतापगढ़, राजस्थान

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